Thursday, 27 June 2013

"मेरी पहली ग़ज़ल "

गाइये, गुनगुनाइए, मुस्कुराइये .....
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हर रोज़ चले आते हो, अफसानों  में हमारे ...
ढूँढू तुम्हे मैं कैसे ....वीरानों में हमारे .....
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हर रोज़ चले आते हो, अफसानों  में हमारे ...
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कहते हो कि चाहा नहीं .....चाहत से कभी तुमको ..
ख़ुद नाम लिया फिरते हो ....अंजानो में हमारे ......
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हर रोज़ चले आते हो, अफसानों  में हमारे ...
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सब कुछ लुटाया तुम पे ...हर पल तुम्ही को पूजा ....
अब नाम दे दो अपना ...दीवानों में हमारे .....
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हर रोज़ चले आते हो, अफसानों  में हमारे ...
ढूँढू तुम्हे मैं कैसे ....वीरानों में हमारे .....
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Sunday, 23 June 2013

" ख़याल "

अर्र्ज़ है ....

१. तेरी तन्हाइयों से फीकी है….
    मेरी शामें इस क़दर ......
   ..............सागरों जाम डूबा हूँ
   ..............क़दम लड्खराते ही नहीं
   तेरी तन्हाइयों से फीकी है….
   मेरी शामें इस क़दर ......

२. तेरी आँखों के नूर से .....
    रोशन हो ये जहां .....
    तेरे इरादों को जो टटोल सके…
    इस कायनात में ….
    वो दर्द ...पीड़ कहाँ ....
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    कि ....
    इसलिये  शायद, क़यामत आती नहीं
    इस दुनिया में ....
    को गर ....
    मिट गया, तेरा ही वजूद तो….
    मेरे लिए
    ये जहाँ कहाँ ......
    दिल में ख़ुदा कहाँ ...
३.