Thursday, 27 June 2013

"मेरी पहली ग़ज़ल "

गाइये, गुनगुनाइए, मुस्कुराइये .....
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हर रोज़ चले आते हो, अफसानों  में हमारे ...
ढूँढू तुम्हे मैं कैसे ....वीरानों में हमारे .....
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हर रोज़ चले आते हो, अफसानों  में हमारे ...
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कहते हो कि चाहा नहीं .....चाहत से कभी तुमको ..
ख़ुद नाम लिया फिरते हो ....अंजानो में हमारे ......
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हर रोज़ चले आते हो, अफसानों  में हमारे ...
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सब कुछ लुटाया तुम पे ...हर पल तुम्ही को पूजा ....
अब नाम दे दो अपना ...दीवानों में हमारे .....
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हर रोज़ चले आते हो, अफसानों  में हमारे ...
ढूँढू तुम्हे मैं कैसे ....वीरानों में हमारे .....
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