अर्र्ज़ है ....
१. तेरी तन्हाइयों से फीकी है….
मेरी शामें इस क़दर ......
..............सागरों जाम डूबा हूँ
..............क़दम लड्खराते ही नहीं
तेरी तन्हाइयों से फीकी है….
मेरी शामें इस क़दर ......
२. तेरी आँखों के नूर से .....
रोशन हो ये जहां .....
तेरे इरादों को जो टटोल सके…
इस कायनात में ….
वो दर्द ...पीड़ कहाँ ....
...............
कि ....
इसलिये शायद, क़यामत आती नहीं
इस दुनिया में ....
को गर ....
मिट गया, तेरा ही वजूद तो….
मेरे लिए
ये जहाँ कहाँ ......
दिल में ख़ुदा कहाँ ...
३.
१. तेरी तन्हाइयों से फीकी है….
मेरी शामें इस क़दर ......
..............सागरों जाम डूबा हूँ
..............क़दम लड्खराते ही नहीं
तेरी तन्हाइयों से फीकी है….
मेरी शामें इस क़दर ......
२. तेरी आँखों के नूर से .....
रोशन हो ये जहां .....
तेरे इरादों को जो टटोल सके…
इस कायनात में ….
वो दर्द ...पीड़ कहाँ ....
...............
कि ....
इसलिये शायद, क़यामत आती नहीं
इस दुनिया में ....
को गर ....
मिट गया, तेरा ही वजूद तो….
मेरे लिए
ये जहाँ कहाँ ......
दिल में ख़ुदा कहाँ ...
३.
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