अर्र्ज़ है ......
(१).......
किसी कि याद में डूब जाना,
मय की तौहीन है .....
.....मेरे दोस्त तू आशिक़ नहीं ...
शौकीन है…शौक़िन है .....
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(२).......
......यूं चौक इस मत दुनिया में ....
की हमने सब को बदलते देखा है ....
.....सोचा था, मय से तौबा कर लूं ...तेरे वादों पे.....
आज ख़ुद खुदा को बहकते देखा है ...
.......
की हमनें सबको बदलते देखा है ......
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