Thursday, 21 March 2013

"मेरी प्रथम कोशिश "

अर्र्ज़ है........

......दे दर्द ....
..... ऐ वफ़ा बेइन्तेहान इतना ....
......कि दर्द में ही सुकून मिले .......
......को गर ....
......मुझे नहीं तो, मेरे राख को ही सही …
......तेरी मुहब्बत नसीब हो ......
......वो ज़ज्बात वो जुनूं मिले ......
....................
......दे दर्द ....
......ऐ वफ़ा बेइन्तेहान इतना ....
......कि दर्द में ही सुकून मिले .......

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