अर्र्ज़ है......
.......
...थमता नहीं है मन्ज़र....
...तेरी यादों का सपनों मे ...
...फिर नाम क्यूँ मिट जाता है तेरा.....
...जब लिखता हूँ अपनों में....
.............................
...कि अब बहूत दूर चले आये...
...मौसमों का रंग भी पड़ गया है फीका...
...शायद अब वो मौज़ बीत गयी.....
...जब धड़कता था तू दिल बन कर
...धडकनों में ......
.............................
...थमता नहीं है मन्ज़र....
...तेरी यादों का सपनों मे ...
...फिर नाम क्यूँ मिट जाता है तेरा.....
...जब लिखता हूँ अपनों में....
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...थमता नहीं है मन्ज़र....
...तेरी यादों का सपनों मे ...
...फिर नाम क्यूँ मिट जाता है तेरा.....
...जब लिखता हूँ अपनों में....
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...कि अब बहूत दूर चले आये...
...मौसमों का रंग भी पड़ गया है फीका...
...शायद अब वो मौज़ बीत गयी.....
...जब धड़कता था तू दिल बन कर
...धडकनों में ......
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...थमता नहीं है मन्ज़र....
...तेरी यादों का सपनों मे ...
...फिर नाम क्यूँ मिट जाता है तेरा.....
...जब लिखता हूँ अपनों में....
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