अर्र्ज़ है ......
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वो यूँ नज़्म लिखता रहा ......
मेरे कब्र की आगोश में .......
.....................उसके आँसूं -ए स्याह से .....
.....................मेरी प्यास बुझती रही ........
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वो यूँ नज़्म लिखता रहा ......
मेरे कब्र की आगोश में .......
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मेरी ये ख्वाहिश है कि ...अपने इस कलाम में कुछ और शब्द जोड़ पाऊँ ...
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