Tuesday, 22 October 2013

"धुंद " ( श्री जगजीत सिंह को समर्पित )

 …ये ग़ज़ल… मैं " ग़ज़ल सम्राट " श्री जगजीत सिंह को समर्पित करता हूँ …
…… जिनके रेशमी आवाज़…………
…… इक अलग ही अंदाज़े-बयां  …….
… और रूह को भी झकझोर कर रख देने वाला…… शब्दों का तर्क़श  ……
के मेरे ज़िन्दगी में एक ख़ास आयाम है  …. महत्व है …
………
 उन भावनाओं को  पीड़ोना, उसे सार्थक करना……. किसी  महासागर के प्यास को….  दो बूँद …
पानी से बुझाने के समान  है  …………
…………………….
......Like millions...Praying hearts and Souls....I firmly believe....
......The Immortal voice of Jagjit Saahab will.....rise again..to support this dying..complex...sophisticated world....with
...reaps of Love, Humanity....and an ample reason to live.

Let the legend....graced with thousands of years..of soulful divine melodies...
....Let the tribute begin......
…………
………… 
… दिल के कोने में, तेरा हाल छुपा रखा  है …
… दिल के कोने में, तेरा हाल छुपा रखा  है …
प्यार में गुज़रे हुये … कई साल छुपा रखा है ….
… दिल के कोने में …… 
………………. 
…. तेरी कसमों का झुरमुट, तेरे वादों का हिसाब ….
…. तेरी कसमों का झुरमुट, तेरे वादों का हिसाब ….
…… दुनिया से छुप-के, पहुंचाये हुए …. खतों का ज़वाब ….
…… दुनिया से छुप-के, पहुंचाये हुए …. खतों का ज़वाब ….
…  अब भी लिखता हूँ तेरी याद में …. गैरों के लिए ….
…  कोई वज़ह तो होगी बे-वफाई की …. ये ख्याल छुपा रखा है …
… दिल के कोने में, तेरा हाल छुपा रखा  है …
… दिल के कोने में, तेरा हाल छुपा रखा  है …
…………
मुझको सब जानने लगे, हो गया सब से क़रीब ……. 
इक तुझे छोड़ के सही …. हर इंसान मेरा रक़िब …
क्यों बना न सका तुझे  अपना ……सवाल खुद से छुपा रखा  है …. 
… दिल के कोने में, तेरा हाल छुपा रखा  है …
… दिल के कोने में, तेरा हाल छुपा रखा  है …
…………. 
तुझ से मिलने  का…… बिछुड़ने का ग़म मुझे ही क्यों मिला …
तेरी यादों का … तेरे इरादों का तोहफ़ा मुझे ही क्यों मिला …. 
तेरी अदाओं पर मेरा मरना …. दिल के चोटों का निशां  …. मुझे ही क्यों मिला … 
…………… 
…………… 
खुदाया…. किसी और दीवाने को तेर लिए बनाया होता … 
ये मलाल … छुपा रखा है  …
… दिल के कोने में, तेरा हाल छुपा रखा  है …
… दिल के कोने में, तेरा हाल छुपा रखा  है …



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