मेरे मन में …मेरे शेरो-शायरी का वो भी जख़ीरा है…
…जो खुद -बा-खुद ……… लब्ज़ों में बयां हो जाते हैं ……
.......... जब मन बोझिल हो जाता है ……
………जब हृदय स्थिर……
और आत्मा बैचेन हो उठती है …………
................
वैसे ही कुछ ख्यालों को …… गुबारों को समेटने कि कोशिश कर रहा हूँ ……
………
............
अर्र्ज़ है
…………
१.
.… कई सालों से ……
… कोई दस्तक दे कर …
… मेरे ज़ख्मों को कुरेद जाता है ....
……
…और पूछता हूँ जो सबब .......
… तो बस ये आवाज़ आती है ....
……………
कि तेरे हरे ज़ख्मों, से जो कराह आती है …
… तेरी याद बन कर……
.... सुकून से उन लम्हों में …
.... चैन से सो लेता हूँ …
………
बांकी पल …
ये खुदाया का कुफ्र …है कि …
………
तेरी याद में रो लेता हूँ ....
………
कि तेरे हरे ज़ख्मों, से जो कराह आती है …… तेरी याद बन कर……
.... सुकून से उन लम्हों में …
.... चैन से सो लेता हूँ …
…………………x ………………
…………………x ………………
२.
… तेर हर अर्र्ज़ को ....
.... मैं अपना फ़र्ज़ समझ …
.... क़बूल किया …
..........
… तेर हर अर्र्ज़ को ........ मैं अपना फ़र्ज़ समझ …
.... क़बूल किया …
..........
… कि.…
शायद एक खुदा के रहते.......
किसी और को ख़ुदा बनाने का…
मैंने भूल किया ……
..........
… तेर हर अर्र्ज़ को ....
.... मैं अपना फ़र्ज़ समझ …
.... क़बूल किया …
…………………x ………………
…………………x ………………
३.
खुदा भी जिसके नूर से .......
हैरान था…
परेशान था ....
ख़ामोश रहा…
.............
.............
मैं वो बन्दा हूँ …
जिसने तेरी नियत टटोली…
और बे-पर्दा किया ……
…………………x ………………
…………………x ………………
४.
मेरे इक ज़िक्र से ही.……
तेरे चेहरे पर.…
ज़ो .... आ जाती रौनक़ ....
…………
ये इशारा है …
इस महफ़िल को ....
कि.…
कोई दर्द छिपा रखा है....
………………
कि बेवफा का ही लिबास ओढ़े रखना ……
जब पत्थर उछले जाए मेरी तरफ़ .......
…
कि इक आंसूं भी बहा …
तो बयां हो जायेगी……
खुद -बा -खुद ……
………
तेरे छलकते काज़ल से ही सही ....
……
वो
.... बे-इन्तहां मुहब्बत ……
जो तूने दिल में दबा रखा है ……
..........
कोई दर्द छिपा रखा है....
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…………………x ………………
५.
……है कुचलने को अमादा ……
… एक इंसान यहाँ ....
... दूसरे इंसान को ....
अपने पैरों तले .......
………
……है कुचलने को अमादा ……
… एक इंसान यहाँ ....
... दूसरे इंसान को ....
अपने पैरों तले .......
……
सबब पूछो ……
तो बड़ी तबियत से कहते हैं कि …
………
वो रोटी बड़ी बेस्वादी सी लगती है …
जिस पर किसी गैर का, नाम न लिखा हो ……
…………
रूह कि प्यास बुझती ही नहीं .......
जब तक……
लहू न मिलायी जाए ……
………
……है कुचलने को अमादा ……
… एक इंसान यहाँ ....
... दूसरे इंसान को ....
अपने पैरों तले .......
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६.
… हो तेरे ख्वाहिशों …
में वज़न इतना …
..........
कि जिन रास्तों से ……
तू भटक भी जाए ……
…………
वो मंज़िल-ए -पाक हो कायनात की …
वो मंज़िल-ए -पाक हो कायनात की …
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