.........( मेरे मय पसंद दोस्तों के लिये ).............
अर्र्ज़ है .......
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क्यों लगा है इंतज़ाम -ए मर्र्ज़ .....
दिल टूटने का .......
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क्यों लगा है इंतज़ाम -ए मर्र्ज़ .....
दिल टूटने का .......
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कुछ और दिल लगा ले ...
.....कि अभी तेरी ...औक़ात बांकी है…
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...क्यों तुझे हो ग़म, दिल टूटने का .....
.....कि अभी तेरी ...औक़ात बांकी है…
......को ग़र ....
...तू अगर पीना चाहे .....
...तो खुदा तेरा साकी है….
...तो खुदा तेरा साकी है….
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क्यों लगा है इंतज़ाम -ए मर्र्ज़ .....
दिल टूटने का .......
inhe mahabaat me tootne se dar lagta hai...
ReplyDeletejinhe apne kisi ke roothne se dar lagta hai...
unke lie ye shayari mashallah hai